Only in Your Arms Chapter 1

 
 Chapter - 1 
सिटी हॉस्पिटल में ```


"आयु बेटा रोना बंद करो बच्चा।ओर अपनी मम्मा से प्रोमिस करो तुम मेरे बिना भी खुश रहोगी। जब भी मुझे मिस करो तो रोना मत क्युकी दिशा आंटी आप का पूरा ख्याल रखेगी। आज के बाद तुम दिशा आंटी की हर बात मानोगी। प्रोमिस करो आयु!"

 


हॉस्पिटल  के बेड पर लेटी हुई एक औरत  जिस का नाम करुणा था जो अपनी जिंदगी की आखिरी सांस ले रही थी और अभी अपनी 8 साल की बेटी जिस का नाम आयु था उसे समझा रही थी कि उसे अब उस के बिना रहने की आदत डालनी होगी और  अब आयु को 
उस की बेस्ट  फ्रेंड दिशा के साथ उस की फैमिली बन कर रहना होंगा।
आयु जिस की  गोल गोल प्यारी सी आंखो में आंसु बह थे रोते हुए अपनी मां करुणा को देख रही थीं जो उस से प्रोमिस मांग रही थीं ।

दिशा जो करुणा  की बेस्ट फ्रेंड थी और अभी आयु के साथ हॉस्पिटल में अपने पति विक्रम के साथ खड़ी थी। 
दिशा जो एक लंबे अरसे बाद अपनी दोस्त से मिल भी रही थी तो ऐसे जब उस की दोस्त  मौत के करीब जा रही थी जिसे देख कर उसे बुरा लग रहा था। क्योंकि वह अपनी फ्रेंड को बचाने के लिए अब नाकाम हो चुकी थी। इसलिए दिशा ने करुणा से कहा था कि वह उस के जाने के बाद उस की बेटी का ख्याल ओर उसे प्यार से अपनी बेटी बना कर रखेगी।
क्युकी आयु का उसी की मां के इलावा और कोई नहीं था जो आयु को प्यार ओर हिफाज़त से रख सके।
वही हॉस्पिटल के बेड पर लेटी हुई करुणा  अपनी बेटी आयु का हाथ पकड़ कर फिर से उस से प्रोमिस मांग लेती है जिस से आयु ओर तेज रोने लगी थी और रोते हुए प्रोमिस कर देती है।
 
करुणा अब मुस्करा कर अपनी बेटी ओर दिशा को देखती है, क्योंकि अब उस के चेहरे पर सकून था क्योंकि वह जानती थी कि उस के जाने के बाद सिर्फ उस की बेस्ट फ्रेंड दिशा ही है जो उस की बेटी को कभी भी उस की कमी महसूस नहीं होने देंगी।

बस अपनी जिंदगी के कुछ अच्छे और बुरे समय को याद करते हुए  मुस्करा कर दिशा को थैंक यू बोल कर अपने आप ही एक दम से उस की गहरी सांसे बिल्कुल थम सी जाती है।
जिस से दिशा फूट फूट कर रोने लगती है क्योंकि उस ने कभी सोचा नहीं था कि करुणा बीच में ही उस की दोस्ती को छोड़ कर चली जाएगी।
आयु जिस ने करुणा का हाथ अभी भी पकड़ा हुआ था वह उसे अब कस कर पकड़ कर रोने लगती है।जिसे के रोते हुए देख कर दिशा खुद को संभाल लेती है और आयु को अपने सीने से लगा लेती है जिस से दिशा उसे अपनी मां की ममता से शांत कराने लगी।
 
 
वही अब दिशा और विक्रम दोनो करुणा की अंतिम विदाई करने के बाद आयु को अपने घर ले कर आ जाते हैं। विक्रम जिसे आयु के लिए बुरा लग रहा था क्योंकि करुणा बहुत अच्छी थी और ये बात उसे भी पता था। ओर अब आयु की जिम्मेदारी खुद उन्होंने अपने उपर ले ली थी। 
विक्रम मल्होत्रा जो एक बड़े बिजनेस मैन थे जिन का बिजनेस वर्ड में जाना माना नाम था। जो दिल के बहुत अच्छे और शांत स्वभाव के इंसान थे। जिन्हें पैसे की कोई कमी नहीं थी।

 

आयु विक्रम का हाथ पकड़ कर कार से बाहर निकल कर आता  है। तभी उस की नजर सामने बहुत बड़े पेलेस पर जाति है जो जितना आलीशान था उतना ही खूबसूरत लग रहा था।
जहां पर गार्डन में बड़े बड़े दो फाऊंटेन बने हुए थे। जिसे देख कर आयु के चेहरे पर हल्की सी स्माइल आ गई क्युकी उसे फाऊंटेन से बहते हुए पानी को देखना पसंद था।
 
वही अब दिशा और विक्रम दोनो आयु का हाथ पकड़ कर उसे घर के अंदर ले जाते हैं। जहां पर घर के अंदर  छोटे दो लड़के मौजूद थे जिन में से एक लड़का आयु की उम्र का  था।
तो दूसरा  उम्र से में कुछ  ही बड़ा लग रहा था क्योंकि उस की उम्र 12 साल की थी।


" आयु ये दोनों मेरे बेटे हैं, जय और वीर" दिशा ने अपने दोनो बेटों को इंट्रोड्यूस कराते हुए कहा। 


दिशा की बात सुन कर आयु उन दोनो को देखती है ।जो उन में से जो उस की उम्र का था यानी कि वीर वो आयु को देख कर मुस्करा देता है जिस को देख कर आयु भी स्माइल कर देती है।
आयु अपने से बड़े जय को देखती है जो उसे घूर रहा था जिस की घूरती हुई हेज़ल आईज को देखती रह जाती है।
 
"बेटा ये आयु हे अब से ये हमारे साथ इसी घर में रहेगी। तुम्हारी छोटी बहन बन कर। चलो आ जाओ अपनी छोटी बहन से अच्छे से वेलकम करो।"

दिशा ने अपने दोनों बेटे जय और वीर से कहा।
जिसे सुन कर वीर तो जल्दी से आयु के पास आ कर उस से हाथ मिला कर दोस्ती भी कर लेता है

लेकिन वही जय अपनी जगह पर खड़ा हुआ था जिसे देख कर दिशा उसे कुछ बोल पाती तभी जय आयु को घूर कर अपनी मॉम से रुड होते हुए कहता है!
" ये लड़की कोन है, मै इसे जानता नहीं हूं और आप इसे हमारे घर ले कर क्यों आ गई !
 सोरी मॉम  but I don't like this girl ओर ये मेरी कोई बहन वहन नहीं है। तो मुझे फोर्स मत करिए कि मैं इस लड़की से कोई रिश्ता रखूं। ओर इस लड़की से कह दीजिए कि मुझ से दूर रहे।"
 
जय ये कह कर वहां से अपने रूम मे चला जाता है।जिस के बाद दिशा गहरी सांस लेते हुए आयु को देखती है जो उदास हो गई थी ।
आयु सेड होते हुए दिशा की तरफ देख कर कहती है। " आंटी मुझे यहां नहीं रहना है, यहां कोई भी मुझे पसंद नहीं करता है।"
 
"आयु प्लीज तुम यही रह जाओ, मै तो तुम्हे पसंद करता हूं न! हम दोनों अच्छे दोस्त हे।" 
वीर ने अपने क्यूट वाइस मे कहा।

दिशा आयु से कहती हैं ``" आयु जय की बात का बुरा मत मानो, वह ऐसा ही है। उसे मै बाद में अच्छे से समझा दूंगी। 
अच्छा चलो हम तुम्हे तुम्हारा रूम दिखाते हैं। जो मैने तुम्हारी पसंद से डेकोरेट किया हे।"

ये कह कर दिशा आयु को ले कर उस के रूम मे ले जाने लगती है जिसे वीर देख कर मुस्कुरा रहा था। उसे मुस्कुराते हुए देख कर विक्रम जी उसे देख कर कहते हैं ```" तुम्हे क्या हुआ है।"


"डेड आयु कितनी जायदा सुंदर है।  मै जब बड़ा हो जाऊंगा तो मुझे आयु से शादी करनी है।"
वीर जवाब दिया ।

जिस की बात सुन कर विक्रम वीर के कान को खीच कर कहता है!
" तुम्हे पता नहीं चला तुम्हारी मॉम ने तुम पर क्या कहा कि आयु तुम्हारी छोटी बहन हैं। 
पर तुम्हे उस से शादी कर नि है। मुझे ये बात तुम्हारी मॉम को बतानी होगी कि तुम काफी बिगड़ गए हो  शरारती बच्चे।"
 
रात के समय 
आयु जो डाइनिंग टेबल पर चुप चाप बैठी हुई थी जहां पर सभी लोग खाना खा रहे थे। ओर वही आयु अपनी मां को मिस कर रही थी क्योंकि उसे अपनी मां के हाथ से खाने की आदत थी। इसलिए अपना सर नीचे कर के बैठी हुई थी।
दिशा जो सभी को डिनर करा रही थी कि तभी उस की नजर नजर आयु पर गई जो अपना खाना खा नहीं रही थी जिसे देख कर दिशा आयु के पास आ कर उस की साथ वाली कुर्सी पे बैठ जाती है और आयु की प्लेट से अपने हाथ से खाना का निवाला ले कर आयु की तरफ बड़े प्यार से बढ़ा देती हैं। ओर उसे खाने का इशारा करती है।
जिस से आयु अपना सर उठा कर दिशा की तरफ नम आंखों से देखती है और खाना खाने लगती है।
 
वही ठीक आयु के ठीक सामने वाली कुर्सी पे जय वीर के साथ बैठा हुआ था और अब तक जय आयु को ही घूर रहा था। जिसे देख कर वीर जो उस के साथ बैठा हुआ था वह जय से  आयु की तरफ देख कर कहता है!
" ब्रो she is cute न"

"व्हाट नोंसेंस! मुझे तो बस स्टूपिड ओर डंप लगती हैं।" जय ने उसे जवाब दिया।
 
"हम्ममम! आप को तो अपने इलावा सभी स्टूपिड ही लगते हैं। " वीर ने मुंह बना कर कहा।
 
 
सुबह के समय 
आयु जो स्कूल जाने लिए रेडी हो चुकी थी जिस की टाई को दिशा सही करती है और उसे रेड्डी कर के उस के माथे को चूम कर प्यार से कहती हैं !


" अच्छे से पढ़ाई करना ओके। ओर अब से ऐसे ही खुश रहना।"
वही ये सुन कर आयु मुस्करा कर हां मैं सर हिला देती है।
 दिशा आयु का हाथ पकड़ कर उसे घर से बाहर गेट पर खड़ी कार के पास ले कर आती है जहां पर जय और वीर अपनी स्कूल यूनिफॉर्म पहन कर खड़े हुए थे।

आयु को देख कर वीर खुश होते हुए दिशा से कहता है !
" मॉम आयु क्या हमारे साथ हमारी स्कूल में पढ़ेगी।"
 
"हां बेटा आयु तुम्हारे स्कूल में पढ़ेगी इसलिए तुम्हे इस का पूरा ध्यान रखना है।"
 दिशा ने वीर को जवाब दिया।

दिशा आयु को वीर के साथ कार में बिठा देती है और तभी दिशा जय को देखती है जो कार में बैठने जा रहा था जिसे रोकते हुए दिशा जय का हाथ पकड़ लेती है जिस से जय दिशा को देख कर बोलता है।

" अब क्या है मॉम! मुझे लेट हो रहा हे !

"स्कूल में आयु का ख्याल रखना! ओर तुम रखोगे, क्युकी मुझे अपने बेटे पर यकीन है कि वो मेरी बात कभी भी नहीं टाल सकता है।"
दिशा ने प्यार से जय से कहा।
 
जिस से जय दिशा से थोड़ा नाराज होते हुए कहता है।

" मॉम मै आप की उस आयु का  कोई बॉडीगार्ड नहीं हूं जो स्कूल में उस का ध्यान रखूं। वीर हे न उस के साथ, ओर वो उस के साथ ही सेम क्लास में हे। तो आप ये बात उसे भी बोल सकती है मुझे नहीं!"


"लेकिन वीर से जायदा मुझे तुम पर विश्वाश हे कि मेरा जय अपने दोनो भाई बहन का ध्यान रखेगा।"
दिशा ने मुस्करा कर कहा।
वही ये सुन कर जय इरिटेट होते हुए बोला। "मॉम अब प्लीज और नही, अब मैं जा रहा हूं।" 

ओर ये कह कर जय कार में आगे वाली पैसेंजर सीट पर बैठ जाता है।
ड्राइवर कार स्टार्ट कर देता है और वही दिशा कार में बैठे हुए आयु ओर वीर को बाय करती है और साथ ही जय को भी।
वही अब कार के अंदर पीछे वाली सीट पर बैठे हुए आयु ओर वीर दोनो बाते कर रहे थे जहां आयु उस से स्कूल के बारे में पूछ रही थी तो वही वीर उसे बता रहा था।वही जय जो आगे बैठा हुआ था उस ने अपने कानो में बड़े बड़े हेड फोन लगाए हुए थे।

 


तभी उस की नजर कार के फ्रंट मिरर पर जाति है जहां उसे आयु दिखाई देती हैं जो पता नहीं नॉन स्टॉप बड़बडा रही थी।जिसे देख कर जय अपने कानो से हल्का सा हेड फोन हटा कर खुद से कहता है।

" what the hell this girl, कितनी ज्यादा अजीब ओर स्टूपिड हैं, और मॉम चाहती है कि मै इस का bodygard बन कर इसे प्रोटेक्ट करूं। " 
 
 
वही दूसरी तरफ 
दिशा जो विक्रम को ब्रेकफास्ट करा रही थी तभी विक्रम मुस्कुरा कर कहता है ।

" आयु के आने से हमारे घर में बेटी की जो कमी थी वो पूरी हो चुकी है। सच में आयु की वजह से ये घर मुझे घर लग रहा है।"


"ये बात आप ने बहुत सही कही हैं, बस हॉप हे कि जैसे हम ने आयु को एक्सपेक्ट कर लिया है बस उसी तरह आयु भी हमें अपना समझ ले।" दिशा ने कहा।
 
"Don't worry दिशा आयु को हम इतना प्यार देंगे कि वह हमें भी अपनी फैमिली समझ लेगी और वैसे भी हमारी आयु बहुत समझदार है।" विक्रम ने दिशा से कहा।
 
 
वही स्कूल में


आयु अपनी क्लास में अकेली बैठी हुई थी तभी वीर उसे ढूंढते हुए उस के पास आ कर बैठ कर कहता है 

"तुम यहां पर क्या कर रही हो। चलो अभी ब्रेक टाइम हुआ है हम दोनो बाहर जा कर खेलते हैं।"
ये कह कर वीर आयु का हाथ पकड़ कर उसे क्लास से बाहर ले कर स्कूल के प्लेग्राउड में ले जाता है, जहां पर बहुत सारे बच्चे खेल रहे थे।
जिन्हे देख कर आयु वीर से कहती हैं ।

" वीर मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।"
 
"लेकिन क्यों?" वीर ने पूछा।
 
जिस से आयु मुंह बना कर कहती है।

" मुझे बास्केट बॉल खेलना है और यहां पर कोई भी बास्केट बॉल नहीं खेल रहा है।"
 
वीर उसे एक दम से कहता है।

" क्या तुम्हे बास्केट बॉल खेलना पसंद है।"
ये सुन कर आयु हां में सर हिला देती है जिस से वीर उस का हाथ पकड़ कर कहता है

" तो चलो मेरे साथ "!
 
ये कह कर वीर आयु का हाथ पकड़ कर उसे वहां से दूसरे प्ले ग्राउंड में ले कर आ जाता है जहां पर उन की क्लास में बड़े बच्चे बास्केट कोड के बीच बास्केट बॉल खेल रहे थे। जिन्हे देख कर आयु की आंखे चमक जाती है !


और वह वीर से अपना हाथ छुटा करबास्केट कोड की तरफ भागने लगती है जिस से वीर उसे रोकने की कोशिश करता है लेकिन आयु उस की बात को न सुन कर बास्केट कोड की तरफ भाग जाती है जिस के पीछे वीर भागता है।

 


वही आयु खुश होते हुए जैसे ही बास्केट कोड के अंदर  आति है तभी एक बास्केट खेलते हुए एक लड़का आयु से टकरा जाता है जिस से आयु टकराने से सीधा मुंह के बल गिर जाति है और उसे चोट लग जाती है।जिसे देख कर वीर डर जाता है और वही बास्केट खेल रहे लड़के आयु को देख कर उस के पास आने लगे थे


आयु अब रो रही थी। तभी वहां पर जय आ जाता है और आयु को देखता है जो अब रोते हुए अपने घुटने ओर हाथ में लगी चोट को देखते हुए रोने लगी थी।


जिसे देख कर जय सभी लड़कों को गुस्से में घूरता है तो सभी लड़के उस के डर से दो कदम पीछे हो जाते हैं क्योंकि जय इस स्कूल में जितना फेमस था उतना ही सभी उस से डरते थे ।

 

जय घुटने के बल रोती हुई आयु के पास बैठ जाता है और उस का हाथ पकड़ कर देखता है जहां पर चोट लगी हुई थी।जिसे अब जय बिना कुछ कहे अपनी पीठ पर बिठा कर वहां से ले कर चला जाता है।
 
 
 
 
To be continue ------ 📖

 

आगे की कहानी जानने के लिए पढ़ते रहिए "Only in Your Arms "

Author KT Girl 
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द्वारा KT Girl
Shared31 Dec 2024
Start 29 Dec 2024
End 29 Dec 2029
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब
  • आप से जुड़ कर, कविता पढ़ कर बहुत अच्छा लगा!🙏❤️🙏❤️🙏
  • क्या खूब लगती है, बड़ी सुन्दर दिखती है ❤️❤️❤️❤️