नमन माँ शारदे
सरसी छंद
सादर समीक्षार्थ
प्रतिदिन जो ध्यान योग करता, पाये सौष्टव लाभ।
तन मन सदा उल्लसित रहता, दमके मुख पर आभ।।
सुख शांति, आनंद की लहरें, मन
सागर सौहार्द।
चेतन मन प्रेम-भाव करुणा, हरपल हिय आह्लाद।।
स्वरचित मौलिक रचनाकार
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र