"खालीपन"

"खालीपन"
जब यह लिख रहा हु तो आँखों मैं आंसू भर आते हैं 
"खालीपन"
जब मेरे दिमाग की नसे अकड़ाने लगे 
जब ये कम्बखत शरीर मेरा अकड़ने लगे 
जब ये मासूमियत का उदासियत का चेहरा खुद से मुक्सर हो जाए 
जब ये मेरी जवानी की जुरिया इतरने लगे 
जब उदासी पूरी तरह शरीर को मन को जकड़ले 
तब मुझे मेरा बाप याद आता हैं 
याद आता हैं वो बचपन जब मैं उसके कंधे पर बैठ कर दुनिया की सैर किया करता था 
मुझे मेरा बाप बहुत याद आता हैं !!
बहुत याद आता हैं !!!
बैठा हु आज किसी काच के दफ्तर मैं
वो दर दर ठोकरे मेरी शहर की खाता हैं
शायद मेरी बाप को भी उसका बेटा बहुत याद आता हैं !!!
गुम चूका हु इन दफ्तरों के कमरों मैं !!
खो चूका हु इन दफ्तरों के कोनो मैं !!!
अब बाप क्यों याद आता हैं !!
क्युकी कल यही वो चट्टान थी 
जिसके सहारे मुज जैसा छोटा सा पत्थर टिका था !!!
याद इसीलिए आता हैं !!!
क्युकी अब वो बूढ़ा हो चूका हैं !!!
और मुलायम भी!!!
बाप बहुत याद आता हैं !!!
अब मैं बड़ा हो गया हु !!! सोचा था उसने समझदार होगया हु!!!
शादी शुदा भी हो गया हु !!!
बस मुझे मेरा बाप बहुत याद आता हैं !!!


द्वारा Yatharth Puri
Shared20 Jan 2026
Start 19 Jan 2026
End 19 Jan 2031
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