होली या दिवाली में हम मिले न मिले, राखी पूनम त्यौहार हम भाई-बहन हमेशा साथ मनाते थे।
माता-पिता के प्यार-दुलार की छत्रछाया, भाई-बहन के स्नेह की रिमझिम, भाभी जी का अपनापन, चिल्लर पार्टी याने की भतीजे-भतीजियों से भरापुरा प्रेमिल परिवार।
रक्षाबंधन त्यौहार साथ मिलकर मनाना हमारे लिए प्यारा-सा महोत्सव था।
राखी के साथ ढेरों दुआएं एवं शुभकामनाएं देती हम बहनें, स्नेहवर्षण करते भाई, विश्वास की रेशम डोर में बंधा रिश्ता और मजबूत होता।
माता जी के नारियल के दूध में इलायची, केसर, बादाम डाल बनाये मीठे चावल का स्वाद का क्या बखान करूं?
माता जी, पिता जी अब रहे नहीं, पर स्वाद याद कर जी ललचाता हैं।
वैसे मीठे चावल हमसे बनते ही नहीं। शायद वह उसमें अपनी सारी ममता उंडेलती होगी।
पिता जी हमारी मनपसंद मिठाइयां, फल, मेवे, मीठा पान ले आते थे।
भैया मसाला बडीशेप का बडा सा पॅकेट लाते, भाभी जी हमारे लिए ढूंढ ढूंढकर सुंदर तोहफे ले आती। माता-पिता के आशीष से भरी गठरी, मंगल कामनाएं, सुंदर तोहफे, पीहर की मधुर यादें ले हम अपने घर इतराती आ जाती। इतनी ख़ुशी जैसे कुबेर का खजाना मिला हो हमें।
भैया-भाभी के राज में आज भी पीहर हमारा हरियाला हैं।
माता-पिता की कमी खलती है, लेकिन हमारे
प्यार-सम्मान में कोई कमी नहीं आयी है।
राखी पूनम का त्यौहार नजदीक आ रहा है।
मनपसंद राखी लेने जाना है हमें।
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र