वारी-वारी जाऊँ वारंवार....

आर-पार कर पृथ्वी की कक्षा, अन्तरिक्ष को छूं लूँ !

माँ भारती का परचम लहराऊँ, अमृत रस पी  लूँ  !
 
साहस के कंधों पर चढ़, ब्रह्माण्ड के रहस्य खोज़ लूँ    !
सागर की गहराइयों में डूब कर चुनौतियों को पेलूँ    !
 
बड़े-बड़े ख़्वाबों के बलबूते सफलता को मैं हर  लूँ  !
प्रयासों के सोपान चढ़ कर माँ भारती का रूप निहारूँ!
 
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बुद्ध, जैन भारत की जान!
धर्म सहिष्णुता, अनेकता में एकता राष्ट्रपुरुष की पहचान!
 
सबका साथ, सबका विकास, सबका कर्तव्य...देश महान!
माँ भारती के चरण-कमल पर समर्पित,भक्त-हृदय-प्राण!  
 
जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान!
आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र, कामयाबी का प्रतिमान!
 
विश्व गुरु बन ज्ञान-ज्योति से रोशन करुं सारा जहान! 
शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान, उन्नत ज्ञान, युवा दिलों की पहचान!
 
वेद, उपनिषद, कुराण, आगम, गुरुवाणी, जीवन आधार!
योग, आयुर्वेद, खगोल, सांख्यिकी, अकूत ज्ञान भंडार! 
 
हर दहलीज पर जले ज्ञान दीप,  द्वार- द्वार वन्दनवार!
हर नौनिहाल के कन्धों पर हो मयूरपाँखि सपन-भार!
 
शुद्ध जल, पोषक अन्न, सुंदर घर, जन-जन अधिकार!
देश पर मर-मिटने को आतुर, जाँबाज़ों का जीवन-सार!
 
उतारूँ तव आरती,  माँ भारती, वारी-वारी जाऊँ वारंवार! 
रत्नगर्भा, जननी जन्मभूमि! नित पूजन करूँ,वंदू सौ बार!
 
इस पर लोग क्या कह रहे हैं