2 1789 2 1789 कल के साये में आज कल और कल में ही उलझे रहे हम,जो कल आया ही नहीं…और जो कल बीत गया,उसे हम भूल गए कहीं।डर है बस इतना —कि इन कल की उलझनों में,कहीं ये आज…हमें ही ना भुला दे।कल के इंतज़ार में,और बीते कल के भार में,आज हाथ से फिसल न जाए —बस यही सोचते रहे हम। Label Directed by द्वारा Diya Jaisinghani Shared21 Feb 2026 Start 20 Feb 2026 End 20 Feb 2031 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कल के साये में आज © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें