2 3 2569 2 2569 मानवता! मानवता मन में खिले, महके चहके बाग।प्रेम गंग बहती रहे, मधु हो सुर लय राग।।मधु हो सुर लय राग, सुरमई जीवन सारा।रवि किरणों का ओज, दया करुणा उजियारा।।आह्लादित हो भोर, नेह सेवा आकुलता।शुभ मंगल हो भाव, फले फूले मानवता।।चंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्र Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared08 Dec 2025 Start 07 Dec 2025 End 07 Dec 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कुसुम सुराणा 09-Dec-2025 Comment Like अप्रतिम! Manish Jain 05-Jan-2026 Comment Like लाजवाब ❤️🙏❤️🙏❤️ Hemant Jain 12-Jan-2026 Comment Like बोहोत अछा पोस्ट है | मानवता! © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें