बारिश की बूंदें
रुमझुम बूंदें झर रही, गाती मीठा गीत।
मन धरती का मचलता, पाकर प्रभु की प्रीत।।
पाकर प्रभु की प्रीत, सजायी पुष्पित क्यारी।
गगरी में भर प्यार, रंग भर ली पिचकारी।।
सुंदर मनहर धूप, मोहिनी बांधे फूंदें।
बादल, बिजली, मेघ, आयेगी रुमझुम बूंदें।।
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • आप से जुड़ कर, कविता पढ़ कर बहुत अच्छा लगा!🙏❤️🙏❤️🙏
  • बहुत ही सराहनीय है। इसे पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई
  • वाह वाह! बहुत खूब! सुन्दर प्रस्तुति!