हौले आई भोर
नमन माँ शारदे
दोहा छंद मुक्तक 

प्राची से रवि रश्मियां, आई हौले भोर।
चेतन सारा जग हुआ, थामे जीवन डोर।।
झूमे कलियां बाग में, महक रही है सृष्टि--
मनभावन बरसात में, नाचे छमछम मोर।।

चंचल जैन
इस पर लोग क्या कह रहे हैं