#जय_माँ_ शारदे
#तिथि - १९/१२/२०२५
बहर -- 2122,2122,2122,212
का़फिया -- आने .... की बंदिश
रिदीफ़ -- के लिए
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आज लिखना है मुझे वो गीत गाने के लिए
और लिखनी वो ग़ज़ल उनको सुनाने के लिए।
सोचता हूॅं मैं कभी लाऊं कहाॅं से शब्द वो,
महफ़िलों में गुनगुनाने और छाने के लिए ।
है जरा मुश्किल बड़ा ये काम मेरे वासते,
वो जरा कोशिश मिरी अंजाम पाने के लिए।
काश मैं भी लिख सकूं नुक़ते जो शेर में,
मिल गया उपवन हमें जुमले सजाने के लिए।
चाहता हूॅं मैं लिखूं वो नज़्म प्यारी यार पे,
भावनाओं को बहा उनको लुभाने के लिए ।
स्वरचित:अशोक दोशी