तन मन योग ध्यान....

#विषय -योगःतन मन और आत्मा का संगम 

#विधा-पद्य




तन मन आत्मा के संगम से,

    निरंतर ध्यान धरना है ।

रखना हो तन स्वस्थ अगर तो,

    योग साधना  करना है।।



  तन का मन से वो रिश्ता  है

     मन से तन ये चलता है 

 मन कितना संयमित आपका

   उस से तन ये खिलता है।।



   मस्तिष्क से मन कर नियंत्रित 

     तुम रास लगा कर रोको 

     मन अगर वो मानें नहीं तो 

      थोड़ा उसको तुम टोको।



    द्वेष क्लेश वो क्रोध मोह सब

       सारे कषाय अघ छोड़ो 

     अपनाओ दरशन अमोघ वो

        निज पापों को तुम तोड़ो ।।


        स्वरचित:अशोक दोशी 

       


इस पर लोग क्या कह रहे हैं