अरे कोई है जिसे आम आदमी के बच्चों की चिंता है? सभी चैनल्स सेलिब्रिटी के बच्चो की चिंता में मरे जा रहे हैं .... जरा उन बच्चो की चिंता कीजिये जो सर्द रातों में फुटपाथों पर सोने को मजबूर हैं .... दिन भर मजदूरी कर, रात को अधभूखे सो रहे हैं.. कुपोषण का शिकार बन कर मौत के मुंह में समा रहे हैं! समाज के संपन्न, सभ्य कहे जाने वाले वर्ग के अत्याचार, शोषण, यौन विकृतियों का शिकार बने बंधुआ मजदूर बच्चे जो अपना बचपन कब का खो चुके हैं, जरा उनकी चिंता भी तो कीजिएं मान्यवर!
शिक्षा की रोशनी टूटी-फूटी, खंडहरनुमा पाठशालाओं की दरों-दीवारों की चौड़ी दरारों से भी जहाँ नहीं पहुँच पायी है, क्या उनकी चिंता करना मिडिया, राजनेताओं, समाज के संपन्न वर्ग के एजेंडा में नहीं हैं?
स्कूल में जाने का सौभाग्य जिन्हे मुश्किल से प्राप्त भी हुआ हैं, क्या उन्हें शिक्षा देने के लिए कक्षाओं में शिक्षक मौजूद हैं? क्या इन मासूम बच्चों को पायाभूत सुविधाएँ भी हम मुहैया करा पाएं हैं?
डिजिटल इंडिया, स्किल्ड इंडिया के नारों के बीच कहीं गुम तो नहीं हो गए हैं ये बच्चे जिन्हे आज भी हम ज्ञान का ' क ख ग' या 'a b c d 'नहीं सीखा पा रहे हैं।
क्या परोस रहे है हम उन्हें 'मिड डे मिल' में? जहर? कूड़ा-करकट? यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ जहाँ देश में अनाज गोदामों में सड़ रहा है, चूहे अनाज के ढेर पर मटरगश्ती कर रहे हैं वहीँ मासूम बच्चे कुपोषण, भुखमरी के शिकार हैं! आज भी गाँव में बच्चे अपनी अस्तित्व की लड़ाई खुद ही लड़ रहे हैं, दुनिया भर के सितम, ज़ुल्म सह कर !
चंद शहर के बच्चों तक ज्ञान की रोशनी पहुँचाने से क्या देश का भविष्य उज्वल होगा? क्या शहर के इन बच्चों की समस्याओं की ओर ध्यान देने के लिए भी पैसे के पीछे दौड़ते अभिभावकों को, समाज के भद्रजनों को फुर्सत हैं? एक तरफ जहाँ ये बच्चें किताबों के बोझ तले दब रहे हैं, गला-काट स्पर्धा के कारण अवसाद तथा तनाव का शिकार बन रहे हैं वहीं इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के आदि बन कर हिंसा, असहनशीलता, अधीरता के भंवर में फंसे जा रहे हैं! क्या 'डिजिटल इंडिया' का सपना देखते इन बच्चों को तनाव से मुक्त नहीं किया जा सकता है? क्या इन्हे संघीय तथा व्यक्तिगत खेलों का प्रशिक्षण देकर इन कमजोरियों से मुक्ति नहीं दिलाई जा सकती हैं?हर क्षेत्र में 'शॉर्टकट' से सफलता पाने की जद्दोजहद के बजाय कड़ी मेहनत-मशक्क़त कर सफलता हासिल करने के लिए क्या इन बच्चों को प्रेरित नहीं किया जा सकता?
सोचिएं! विचार कीजिएं!! विश्व गुरु बनने के ख़्वाब देखनेवालों... विश्व में सफलता का परचम लहराने की सोच रखने वालों! अभी भी वक्त है! गुलशन की इन खिलती-खिलखिलाती कोमल पौध को समय से पहले ही कीट-कीटाणुओं का ग्रास बनने से बचाना होगा! किसलय का उचित संरक्षण करना होगा तभी देश का भविष्य उज्जवल तथा महफूज़ रहेगा!