शक्ति पुंज तू, समर भवानी!
आदिशक्ति तू, माँ कल्याणी!
ब्रम्हांड व्यापिका, तू पाणिनी!
करुणा स्वरुप तू, माँ मानिनी !
नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी! नमस्तस्यै!
रोग-शोकहरिणी, कुरुक्षेत्र सिंहनी!
दुष्ट-दामिनी, तू महिषासुरमर्दिनी!
ज्ञानस्वरूप तू, तेजोमय जननी!
ॐ कार नाद तू, ब्रम्हांडवासिनी!
नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी! नमस्तस्यै!
तेरी महीमा अगम्य, सिंहआरोहिणी !
नवनीत सी कोमल, मृदुभाषिणी!
विजयश्री दायिनी, देवी कात्यायनी|
ब्रम्हांड-सुंदरी, त्रिशूल-कमल धारिणी!
नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी! नमस्तस्यै!
वात्सल्य-सुधारस बरसे अमिधार जी!
अमृत कलश प्रक्षालन चन्दन केसर जी !
षष्टम रूप माँ दुर्गा, आदि शक्ति वज्र सी!
दे विजय-अध्याय-ताम्रपट्ट भेंट जी!
नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी! नमस्तस्यै!
विजय-दुंदुभि खल-संहारिणी!
कालरात्रि तू असुर मुंड-धारिणी,
शस्त्र कमल चारभुजा धारिणी!
कात्यायनी, दुर्गारूप भय-नाशिनी!
नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी! नमस्तस्यै!
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा,मुम्बई।