कृष्ण जन्माष्टमी पर...

विधा: मनहरण घनाक्षरियां 

   कृष्ण व कृष्ण जन्म पर 

८८८७


१)

देवकी नंदन प्यारे,

यशोदा जी ने दुलारे,

मथुरा में जन्म लिये,

  कृष्ण गोपाल थे ।


उनके अनेक नाम,

 द्वारिकाधिश धाम।

खेले रास रंग श्याम,

  करे वे धमाल थे।


वे बजाते थे बांसुरी, 

रूप रंग मनोहारी ।

 लीलाए अपरम्पार ,

बाल सुकुमाल थे।


अर्जुन के वे सारथी,

थे  योद्धा  वे महारथी।

महाभारत ग्रंथ वो,

कंस के वे  काल थे।

......

२)

लिये जेल में जनम, 

मामा कंस था अधम,

इतिहास पौराणिक ,

कृष्ण  अवतार थे ।



जाना हमनें  वृतांत ,

कहन‌ वो कृष्ण कांत,

वासुदेव तात   प्यारे‌,

वे  जवाब दार थे ।


कुंज गली  वो  प्यारी, 

राधा रानी वो दुलारी,

रचाएं रास रंग वे,

कान वो‌ मुरार थे ।


शब्द नहीं मेरे पास ,

 लिखूं कैसे कृष्ण रास,

छवि  किशन‌ कान की,

 जग में जगार है।

.......

३)



नाम  नंद गोपाल, 

उन्नत उनका भाल,

सुदामा के मित्र वे ,

कृष्ण भगवान थे।



थी रुक्मणी सत्यभामा, 

भद्रा कालिंदी थी वामा,

सत्या, मित्रबिंदा के वे,

  स्वामी जो महान थे ।



जामवंती का उल्लेख,

राधा प्यारी वो सुरेख,

समर्पित   गोपिकाएं,

  कृष्ण बलवान थे ।


ये तो उनका संसार,

लिये थे संयम भार,

 तिर्थंकर गोत्र बांधे, 

  बडे़ दया वान थे।

......

४)

नेमी नाथ के चचेरे ,

रिश्ते गहरे   घनेरे,

 बलवान बलभद्र ,

व्यक्तित्व वो जानिए।




भोगावली कर्म बंध‌,

 तोड़े वे जग सबंध,

  जैन मत अनुसार, 

   तिर्थंकर मानिए।


    राग द्वेष कर परे,

 कर्म निर्जरा वे करें,

  लो कृष्ण जी से प्रेरणा,

     प्रण ऐसा ठानिए ।


 

 तोड़ो  बेड़ियां, पाप की,

    संसार अभिशाप  की,

       धर्म संसार भेद को,

         सूक्ष्मता से छानिए।


...........

५)

यूं न बने भगवान,

बने ऐसे न महान,

किया होगा त्याग बड़ा,

छान कर्म ग्रंथ को।


जैन धर्म  है उदार, 

उदार है सुविचार ,

संभव आत्म उद्धार, 

पाओ उस पंथ को।


चाहे कोई राच रचें,

पाप में  हो रचे पचे,

करले जो प्रायश्चित ,

तोड़े कर्म  बंध को।


 उम्र भर रहे अंध,  

 पर एक है प्रबंध ,

अंत में भी जग गये,

फैला दे सुगंध को ।

............


स्वरचित:अशोक दोशी 



 









  



 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं