शब्दांजलि
सम्राज्ञी सुर लय की आशा।
तोडा आतम तन का पाशा।।
सूना  साज  मन  निराशा रे।
हैं  श्रद्धावनत   हताशा   रे।।

चंचल जैन
इस पर लोग क्या कह रहे हैं