रक्षाबंधन!


श्मशान की नीरवता को भंग करती आग की लपटें धूं धूं करती आसमान की ओर बढ़ रही थी! मन उद्विग्न था! सब से कम उम्र की बहन कैंसर से जंग हार कर समाधि मरण का वरण कर चूकी थी और हम सब जीवन की नश्वरता को महसूस कर स्थित:प्रज्ञ से नि:शब्द खडे थे!

फोन की घंटी आग के बंबे की घंटी सी घनघना रही थी!
चिता की आग धगधगा ही रही थी और खबर मिली कि छोटे भाई का आक्सिडेंट हुआ हैं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं! पल भर के लिए तो ऐसे लगा मानो पैरों तले से जमीन खिसक गई थी!
हम अस्पताल पहुंचे! किस्मत से वहां से गुजर रहे डॉक्टर मित्र ने उसे देखा और हम सबको फोन किया! हमारे पहुंचने से पहले ही उसका इलाज शुरु हो चूका था! 
बाईक और रिक्षा की टक्कर हो चूकी थी!छोटे भाई के पैर हड्डी टूट गई थी! ! रिक्शावाले ने खुद भाई को रिक्षा में डाल अस्पताल पहुंचाया था!
हम मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे! तभी रिक्शावाले के पिता भी वहां पहुंच गए! वो डरे हुए थे, कहीं हम पुलिस केस न कर दे..एक तो गरीबी और उसमे पुलिस की झंझट मानो अकाल में तेरहवां महीना ! वो अपने जिगर के टुकड़े का पक्ष लेकर समझाने की कोशिश कर रहे थे!!
कुछ पल मैं मौन खडी रही लेकिन फिर मैंने उन्हें कहा,," भाईसाहब! देखिए! आज रक्षाबंधन के दिन हमारे भाई की जान बच गई, यह हमारे लिए बड़ी राहत की बात हैं! हमारे लिए इससे बड़ा उपहार आज रक्षाबंधन के दिन और क्या हो सकता है? लेकिन आप मेरे पिताजी आने के पहले यहाँ से चले जाइए! मेरे पिताको उनके बेटे के सिवाय कुछ भी दिखाई नहीं देगा, न आपका तर्क समझ में आएगा न आपकी सफाई! मैं उनके गुस्से को जानती हूं मानो ज्वालामुखी से बहता लावा! आप सफाई देने जायेंगे तो उनका हाथ भी उठ सकता हैं! क्योंकि आप के जैसे ही उन्हें सिर्फ अपना पुत्र ही दिखाई देगा! हम आपके आभारी हैं... रक्षाबंधन के दिन हमारे वीरा, हमारे भाई की मजबूत जीवन डोर सही सलामत रही! स्नेह का प्रतीक, हमारा भाई आज राखी बंधवाने के लिए मौजूद है यह हमारे लिए अब तक मनाई गई राखी का सबसे कीमती उपहार हैं! आप निश्चिंत रहिए! गलती किसकी भी हो, न हम पुलिस केस करेंगे न हमें आपसे कुछ और चाहिए! बहुत बहुत धन्यवाद! आप जल्दी से चले जाइए यहां से! मेरे पिता के आने से पहले!! मैं हाथ जोड़ती हूं आप से! एक बहन को तो खो ही चुके है हम...!"
मेरी आंखों में अनहोनी की कल्पना मात्र से आंसू बहने लगे! राखी की रेशमी धागों ने अपनी अक्षुण्ण शक्ति का, स्नेह के बंधन की महत्ता का जीवंत प्रमाण दे दिया था! शायद बहनों की राखी के रेशमी धागे 
यमराज के कदमों को बांधे रखने में सक्षम थे!
स्नेह की रेशम डोर भाई की कलाई पर चमक रही थी और हम सब चिता से निकलती ज्वालाओं की आग को जहन में दबाए, भाई को ज़िंदगी बक्शने के लिए परमपिता परमात्मा का आभार व्यक्त कर रहे थे! राखी... भाई के जतन ...सुरक्षित रहे यही प्रार्थना कर रहे थे! 

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
   
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत सुन्दर कहानी! आगे जे वहाग का इंतज़ार रहेगा!🙏❤️🙏❤️🙏❤️🙏