सूनी सूनी सी दिल की गली रह गई

ग़ज़ल 

सूनी सूनी सी दिल की गली रह गई 

तू गया जब से दुनिया थमी रह गई 

 

फिर से बारात लौटी किसी द्वार से 

एक दुल्हन सजी की सजी रह गई 

 

गीत के अर्थ बिल्कुल हैं बदले हुए 

नाम की सिर्फ़ अब मौसिक़ी रह गई 

 

भर गया जब खिलाड़ी का मन खेल से 

कोई चौसर बिछी की बिछी रह गई 

 

बज़्म में यार मुझसे मुख़ातिब भी था 

बात फिर भी मेरी अनसुनी रह गई 

 

बलजीत सिंह बेनाम 

हाँसी (हरियाणा )


द्वारा Baljeet Benaam
Shared07 Apr 2026
Start 07 Apr 2026
End 07 Apr 2027
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