त्याग मत उठाओ उसे, मत बातें करो उससे। आज उसका आखिरी चरण का इम्तिहान है। मैं नहीं चाहती कि वह मुझे इस हालत में मिले, तुम तो जानती हो कितने कमजोर दिल का है वो  .. टिना अपने सिरहाने बैठी दिशा को कहती रही। 
यार, टिना वह तुम्हारा दोस्त है। जितनी जरूरत तुझे उसकी है, उतनी ही उसको भी। बार - बार तुम्हें यूँ फोन करने का मतलब है कि वह तुमसे अपने इम्तिहान के लिए गुड लक चाहता है पर तू तो उसका फोन उठा भी नहीं रही। 
इस हालत में कैसे उठा सकती हूँ उसका फोन, मेरे बात करने से ही वह भांप लेगा यह कुछ परेशान है , मैं उसे परेशान नहीं करना चाहती। 
तुम बात करो उससे बिल्कुल आम बातें जैसे हररोज किया करती हो, बिल्कुल हिचकिचाओ मत कुछ नहीं होगा। मैं हूँ ना तुम्हारे साथ.. दिशा टिना का  साहस बढ़ाती है। 

ट्रिंग ट्रिंग.. फोन की घंटी बजते ही फोन उठा लिया जाता है। 
हैलो , क्या यार टिना कितनी देर लगाती हो फोन उठाने । मैं कितनी देर से तुम्हें फोन लगा रहा हूँ ? .. शरन ने पटाक से सवाल किया। 
वह क्या है न मैं कुछ काम में थी और फोन चार्ज पर लगाया था .. टिना ने साधारण- सा बहाना बता दिया। 
अच्छा, अच्छा मुझे पेपर के लिए गुड लक नहीं दोगी? 
हा, हा क्यों नहीं तुम्हारे इस आखिरी चरण की परिक्षा के लिए बेस्ट ऑफ लक.. इतना कहते ही टिना ने उसको प्यारी सी किस दी। 
हाय, मैं तो तुम्हारे इस अंदाज से ही सफल हो गया, चलो मैं अब फोन रखता हूँ। समय हो गया, मुझे अंदर जाना होगा इम्तिहान के लिए, चलो बाय। 
बाय.. टिना के कहते ही फोन कट कर दिया। 

देखा, कितना सहज था उससे बात करना और तुम कितनी डर रही थी। अब तुम्हारी बातों से उसका भी मन शांत और तुम्हारा भी.. दिशा उसे समझा रही थी कि उसने शरन को फोन कर कितना अच्छा किया । 
हा, ये बात तो है अब वह चिंता मुक्त होकर अच्छे से अपना पेपर खत्म कर सकता है । 

टिना तो आसानी से कह गई ये बातें किन्तु उसे डर था वह तीन घंटे बीत जाने के बाद क्या होगा? वह जानती थी कि शरन को कोई भी बात छुपाने से कितनी नफरत है। उसका मानना था कि बात कोई भी हो, उसे तुरंत बता देनी चाहिए चाहे बात कौनसी भी हो? 

जब शरन का नंबर देखा तो दिल घबराहट के मारे कांपने लगा। टिना ने कांपते हाथों से मोबाईल उठाया और ढाढस बांधकर बातें करने लगी। 
वह कुछ कहती उससे पहले ही शरन कहने लगा, आज मैं बहुत खुश हूँ टिना, तुम्हारे साथ के बजाय ये सब हासिल नहीं हो पाता। तुम्हारे मनोबल और प्रेरणा की बदौलत मैं ये परिक्षा अच्छे से दे सका, यकीनन मैं इसमें अच्छे अंक प्राप्त कर लूँगा। जो मुझे तुम जैसी दोस्त मिली और एक अच्छे मार्गदर्शक जिसने राह भटके नौजवान को सही रास्ता दिखाया.. पूर्ण आत्मविश्वास के साथ शरन कह रहा था। 
शरन जब - जब मुसीबतों में फंसा तब - तब उसको किसीने मदद की वह एकमात्र टिना ही थी। उसके हर सुख - दुख में वही साथ खड़ी रही। टिना का स्वभाव ही ऐसा रहा है कि वह सबको मदद कर ही देती है, उसे जो खुशी औरों का काम कर देने से होती वह कहीं और नहीं। 
शरन जब छोटा था, तब बड़ा ही चंचल और दिमाग में तेज था किंतु जैसे उम्र बढ़ती चली गई वह एकदम से चुप हो गया। उसे सारा जीवन नीरस सा लगने लगा। लेकिन जब उसकी मुलाकात टिना से हुई तो मानो उसकी दुनिया ही बदल गई । वह टिना से घंटों तक बातें करता, कुछ आसपास के बदलते माहौल की या फिर पढ़ाई की। उनकी खूब बनती। देखते- देखते उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। 

हा, हा मुझे भी बहुत खुशी हुई कि तुमने अपनी मेहनत पर यह परीक्षा सफलता से पूरी की, आगे की जर्नी के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ  .. उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। 
चले, हम कहीं मिलते है। 
शरन अभी नहीं कुछ दिनों के लिए मैं बाहर हूँ, बाद में मिलेंगे। 
क्या यार, तुम भी कल परसो चली जाती। आज हम जश्न मनाते, खैर कोई बात नहीं तुम्हारे फोन का इंतजार रहेगा। 
हा, हा ठीक है चलो बाय मिलते है ..  इतना कहकर टिना ने फोन काट दिया। 

दिशा, मैं अब बहुत दूर जाना चाहती हूँ, मैं नहीं चाहती कि मेरे कारण शरन की जगहंसाई हो .. टिना फैसला कर चुकी थी। 
क्या है तुम्हारा अंतिम फैसला है? समाज के कारण तुम अपने प्यार की बलि दोगी जो खुद से ज्यादा तुम्हारी फिक्र करता है उसे छोड़ दोगी। 
दिशा मैं नहीं चाहती कि मेरे कारण वह जिंदगी भर रोता रहे, मुझे उसे छोड़ना ही होगा.. टिना स्पष्ट रूप से कह चुकी। 
दिशा ने कुछ भी नहीं कहा और वह उसे छोड़कर कहीं दूर चली गई, बहुत दूर। 

दो - तीन दिन का कहकर गई लेकिन दो हप्ते बीत चुके फिर भी फोन न आया। ऐसा नहीं कि शरन ने फोन न किया हो, जब फोन किया तो वह बंद आया सोचा की चार्ज नहीं होगा। अब तो उसकी चिंता और भी बढ़ने लगी। पिछले कुछ दिनों से लगातार फोन बंद आ रहा था। जब उसके घर गया तो पता चला कि वह यह शहर छोड़कर कहीं निकल गए है। 
शरन को यह बात अजीब सी लगी। ऐसे अचानक वह बिना कुछ कहे, शहर छोड़कर कैसे जा सकती है। उसी वक्त शरन को दिशा का ख्याल आया कि दिशा तो टिना की सबसे अच्छी दोस्त है, वह उसके बारे में सब जानती होगी। 

शरन बिना देरी करें दिशा को मिलने गया। शरन को आता देख दिशा समझ चुकीं की ये टिना के बारे में पूछने आया है। 
कहो शरन कैसे आना हुआ, अंदर आओ .. 
रहने दो , मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूँ कि टिना कहाँ पर है। दो दिनों की बात कहकर दो हप्ते हो चुके और तो और उसका फोन भी बंद आ रहा है  .. 
मैं नहीं जानती, मेरी भी उससे कोई बात नहीं हुई .. 
मैं जानता हूँ, तुम उसके बारे में सब जानती हो, छुपाने की कोई जरूरत नहीं है  .. 
मैंने कहा ना एकबार मैं कुछ नहीं जानती, चले जाओ यहाँ से और उसे भूल जाओ समझ लेना तुम्हारा और उसका साथ इतना ही था.. क्रोध के भाव साफ - साफ दिखाई दे रहे थे। 
इतनी क्रोधित क्यों होती हो और तुम नहीं बताओगी उसके बारे में तो क्या मैं शांत हो जाऊँगा, मैं अब उसे हर हाल में मिलकर रहूँगा चाहे उसकी तलाश के लिए पुलिस के पास भी जाना हो.. 

पुलिस का नाम सुनकर दिशा डर गई और टिना के बारे में शरन को सबकुछ कह दिया। 

शरन टिना को खोजने उस पते पर पहुँच गया जो दिशा ने उसे दिया था। 
क्यों? आखिर क्यों मुझे अकेले छोड़कर यहाँ पर चली आई, क्या तुम्हें मुझपर विश्वास न था कि मैं तुम्हें इस हालत में स्वीकार करूँगा। 
नहीं शरन नहीं, मैं नहीं चाहती कि तुम्हें लोग ताना कसे कि देखो एक सरकारी अधिकारी की पत्नी विकलांग है और उसे वह ठीक भी नहीं कर सकता। तुम्हें कोई मुझसे अच्छी लड़की मिल जायेगी, तुम मुझे छोड़कर चले जाओ। 
समाज के भय और तानों के कारण मैं तुम्हें छोड़ दूॅं, ऐसा तुम सोच भी कैसे सकती हो? तुम्हारा जो स्थान मेरे जीवन में है, वह कोई अन्य औरत पूरी नहीं कर सकती। तुम जैसी भी हो, मुझे स्वीकार हो। 

शरन उसे बहुत समझाने की कोशिश करता रहा लेकिन वह नहीं मानी। वह इस वातावरण में आनंदमय थी, जो खुशी उसे यहाँ मिलती थी वह कई और नहीं। 
शरन ने भी कुछ जोर- जबरदस्ती न की, बस अपना फैसला सुना दिया उससे पहले ही वादा ले लिया की तुम मेरे फैसले के विरुद्ध न जाओगी। 

वह दोनों खुशी- खुशी उन्हीं वादियों में अपना जीवन बिताने लगे। हमेशा तुम्हारे साथ यही रहूँगा दुनिया से दूर यही उसका अंतिम फैसला था ।

मंथन विनायक देवरे " हिम "

द्वारा MANTHAN DEORE
Shared12 Feb 2025
Start 25 Feb 2025
End 25 Feb 2030
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