हजारो नौजवान जान हथेली पर रख.. थल सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती होते हैं ...मगर ये घोटालेबाज, मौत के सौदागर !! ...कब बाज आएंगे ये अपनी घिनौनी हरकतों से?..सेना के साजो सामान में दलाली..हथियारों में दलाली..वाहनों में दलाली..न गुणवत्ता की फिक्र न जवानो की चिंता..जनता और जनता का पैसा गया भाड़ में!!...क्या देश और ज़मीर दोनों ही बेच दिया हैं इन्होने?
माँ..कैसे कोई राष्ट्र अपने जवानो को दांव पर लगा सकता है? क्या शहीदों की कोई कीमत नहीं? इतनी सस्ती है हमारी शहादत? इतना सस्ता है माँ का दूध? क्या घर के जयसिंह से लड़ते-लड़ते शहीद होने के लिए हैं हम? आज नक्सलवाद और आतंकवाद दोनों की आग में झुलस कर जवान शहीद हो रहे हैं... भले ही सारा स्वर्ग का सभागार आज हॉल 'हाउसफुल' है...फिर भी देश में सिर्फ माफिया का ही राज है? कहीं हथियारोंके सौदागर तो कहीं धरती के लुटेरे खनन माफिया..कहीं नकली दवा बेचने वाले दरिन्दे तो कहीं तेल माफिया...संसद के अंदर बाहर... देख रही हो न तमाशा? महान विभूतियों का अपमान! आखाड़े में भीगी बिल्ली और संसद में पहलवानी दिखाते जनप्रतिनिधि? कैसे सौंप रहे हैं तुम्हारे अंश इन्हें देश?
खलमर्दिनी! दिखाओ अपना संहारक रूप! कर दो खल संहार!
माँ देखो! तेरा लाल विनायक सावरकर गा रहै है...
"ने मजसी ने , परत मातृभूमि ला...सागरा प्राण तळमळला.."
माँ भारती! कैसे सुनाऊँ तुम्हें अपनी पीड़? शहीदों की मजारोपर मोमबत्तियां तो बहुत जलती हैं ...मगर..माँ..शहीदों की जलती आत्मा को कोई समझ पायेगा धरा पर?
माँ भारती! मैं फिर जनम लूँगा तुम्हारी रत्नगर्भा कुक्षी से .तेरे खातिर...मेरी माँ....जननी जन्मभूमि के खातिर!!