आव्हान... हे मातृभूमि, जननी जन्मभूमि, माँ भारती! तुझे कोटि कोटि वंदन!
स्वर्ग में महफ़िल सजायें बैठे वीर शहीदों का आप को )भावभरा नमन, अभिवादन!! 
आपकी याद में एक शाम का आयोजन किया जा रहा है..'एक शाम माँ भारती के नाम'..स्वतंत्रता सेनानी सावरकर, तिलक, लालजी जैसे लोग बालकनी में बैठे हैं तो राजगुरु, भगत सिंह जैसे जाँबाज अग्रणी पंक्ति में विराजमान हैं ...सुभाष  और गाँधी साथ-साथ बतिया रहे हैं ...देख माँ..वो बिस्मिलाह.. विद्यार्थी...सब तुम्हे याद क़र रहे हैं ...यह मेरी धरती है..भारत भूमि जिसने हमें जन्म दिया..माँ..सब तेरे दूध का कर्ज चूका कर यहाँ स्वर्ग में भी तुझे याद कर राहें हैं।

माँ भारती! क्या कहा आपने? वो करकरे..सालसकर...उनके रिश्तेदार आपको मिले थे ..क्या कह रहे थे वो? क्या? उन्हें नकली जाकीटो ने धोका दिया..वर्ना वो दुश्मन के छक्के छुड़ा देते...और वो आमटे.!.उसने तो सीधे दुनाली ही अपने सीने पर रख दी थी..देश के खातिर!...

माँ भारती! जल-थल-वायुसेना के जांबाज यहाँ लाल सोफे पर बैठे हैं!...जिन्हें शौर्य चक्र और परमवीर चक्र से नवाजा गया था मरणोपरांत!! जानती हो क्यों शहीद हुए वो? उनके हथियार दुश्मन के सामने अचानक बन्द पड़ गएँ ..कहीं राडार ने गलत सिग्नल दे दिए तो कहीं घटिया गुणवत्ता के टैंक में आग लग गई ...कहीं गोला बारूद ख़तम हो गया तो कहीं तोफो ने गोले दागना बन्द क़र दिया था। 
माँ! तेरा बेटा कायर नहीं था! जिन्दा रहता कुछ पल और तो दस-बीस और मार क़र मरता!

माँ भारती! बेशक़ शहादत पर हमें गर्व हैं। हौसले बुलंद हैं हमारे ...देश पर म़र-मिटने का जज्बा लिए हम देश की सुरक्षा का जिम्मा उठा रहे थे.. मगर 
माँ..वायु सेना के वो अंकल कल  मुझे मिले थे...बहुत खुश  थे कि स्वर्ग में बेटे से मिलन हुआ !! वो दुश्मन से लड़ते-लड़ते नहीं मरा था बल्कि मिग २२ की ट्रेनिंग ले रहा था और प्लेन क्रेश हो गया...माँ..तू वहां हो क़र आई थी न! वो आंटी मुझे बेहद प्यार करती थी..मेरा युनिफार्म देख क़र हमेशा मुझे सीने से लगाती थी और कहती थी, मैं भी मेरे 'जीत' को वायु सेना में भेजूंगी..उसके पापा शहीद हुए तो क्या हुआ..देश की सेवा करने के लिए बेटा तो है न!!

माँ भारती! तुम्हारी दुर्दशा देख क़र सभी खून के आंसू रो रहे हैं! माँ! तुम्हारे सीने पर ये घाँव?...कैसे बर्दाश्त क़र सकते हैं हम?
हजारो नौजवान जान हथेली पर रख.. थल सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती होते हैं ...मगर ये घोटालेबाज, मौत के सौदागर !! ...कब बाज आएंगे ये अपनी घिनौनी हरकतों से?..सेना के साजो सामान में दलाली..हथियारों में दलाली..वाहनों में दलाली..न  गुणवत्ता की फिक्र न जवानो की चिंता..जनता और जनता का पैसा गया भाड़ में!!...क्या देश और ज़मीर दोनों ही बेच दिया हैं इन्होने?

माँ..कैसे कोई राष्ट्र अपने जवानो को दांव पर लगा सकता है? क्या शहीदों की कोई कीमत नहीं? इतनी सस्ती है हमारी शहादत? इतना सस्ता है माँ का दूध? क्या घर के जयसिंह से लड़ते-लड़ते शहीद होने के लिए हैं हम? आज नक्सलवाद और आतंकवाद दोनों की आग में झुलस कर जवान शहीद हो रहे हैं... भले ही सारा स्वर्ग का सभागार आज हॉल 'हाउसफुल' है...फिर भी देश में सिर्फ माफिया का ही राज है? कहीं हथियारोंके सौदागर तो कहीं धरती के लुटेरे खनन माफिया..कहीं नकली दवा बेचने वाले दरिन्दे तो कहीं तेल माफिया...संसद के अंदर बाहर... देख रही हो न तमाशा? महान विभूतियों का अपमान! आखाड़े में भीगी बिल्ली और संसद में पहलवानी दिखाते जनप्रतिनिधि? कैसे सौंप रहे हैं तुम्हारे अंश इन्हें देश?
खलमर्दिनी! दिखाओ अपना संहारक रूप! कर दो खल संहार!  
माँ देखो! तेरा लाल विनायक सावरकर गा रहै है...
"ने मजसी ने , परत मातृभूमि ला...सागरा प्राण तला.."

माँ भारती! कैसे सुनाऊँ तुम्हें अपनी पीड़? शहीदों की मजारोपर मोमबत्तियां तो बहुत जलती हैं ...मगर..माँ..शहीदों की जलती आत्मा को कोई समझ पायेगा धरा पर?
माँ भारती! मैं फिर जनम लूँगा तुम्हारी रत्नगर्भा कुक्षी से .तेरे खातिर...मेरी माँ....जननी जन्मभूमि के खातिर!!

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • ❤️❤️
  • बहुत खूब.. दीप से दीप जलेंगे तो जीवन रोशन हो जायेगा! प्रेरणादायक सुन्दर प्रस्तुति!
  • वाह! बहुत उम्दा!
  • बहुत सुंदर
  • वाह! बहुत बढियाँ!
  • बहुत खूब.. दीप से दीप जलेंगे तो जीवन रोशन हो जायेगा! प्रेरणादायक सुन्दर प्रस्तुति!