नमन माँ शारदे 🙏🙏वासुदेव छंद।
आभा बन कर, तुम आओ।
शीतल ऋतु बन, छा जाओ।
लहरों पर चढ़, हर्षाओ।
परचम दिल पर, लहराओ।।
दीन-दुखी मन, शमन करो।
नित निर्मल पथ, गमन करो।
तज कषाय प्रभु, नमन करो।
विषधर सम मत, वमन करो।।
तन केसर सम, सुरभित हो ।
मन-चंपा अति, पुलकित हो।
उपजाऊ यह, है माटी ।
शौर्य- विजय की, परिपाटी।।
अरिजन है बहु, बलशाली।
दुश्मन से कर , रखवाली।
खल दल मर्दन, है जारी।
यौवन अर्पण, कर तारी।।
लोकतंत्र बहु, चमकाना।
गरिमा चहुँदिशि, फैलाना।
देश-धर्म पर, मिट जाना।
रण में आहुति , दे आना।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।