कुण्डलिया छंद :
तुम सम कोई है भला, शिशु का पालनहार।
जन्मभूमि माँ भारती, जननी जय जयकार।।
जननी जय जयकार, सदा कर ममता वर्षण।अदभुत माँ उपहार, करूं मैं पंकज अर्पण।।
जीवन तारणहार, पीड़ का कर दे उपशम।
जननी भारत मातु, नहीं है दूजा तुम सम।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।