शीर्षक : ज़िन्दगीनामा!
जिंदगी बहती धारा …
छूने को छटपटाती किनारा...
पथरीली राहों से गुजरती ....
शोख, चंचल यौवना !
कही चट्टान से भिड़ती,
माँ दुर्गा सी वीरांगना...
सागर मिलन को अधीर,
मीरा सी विरहिणी महामना!
कहीं दहाड़ती सिंहनी !
कहीं मर्दानी झाँसी की रानी!
कहीं प्यासी विरहिणी!
कहीं शर्मीली तेजस्वीनी !
जिंदगी के साज़ पर,
छेड़ा खुशियों का तराना...
ख़ुशी, कभी गम का सफ़र …
याराना है सदियों पुराना !
अथक, अटूट प्रयास हमारा...
शौर्य गीत है ज़िंदगीनामा प्यारा!
मनचाही दिशा में मोड़ दो,
जिंदगी की बहती जलधारा!!
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र!