शक्ति पुंज तूं, समर भवानी,
आदिशक्ति तूं, माँ कल्याणी!
ब्रह्माण्ड व्यापिका, तूं पाणिनी!
करुणा स्वरुप तूं, माँ मानिनी!
रक्तबीज संहारिणी, कुरुक्षेत्र सिंहनी!
दुष्ट-दामिनी, महिषासुरमर्दिनी!
ज्ञानस्वरूप तूं, तेजोमय जगत जननी!
ॐ कार नाद तूं, ब्रह्माण्ड निवासिनी!
तेरी महीमा है अद्भुत, सिंहगामिनी!
तूं नवनीत सी कोमल, मृदु भाषिणी!
तूं सृजन-संवर्धन की देवी सुहासिनी!
तूं ब्रम्हांड-सुंदरी, त्रिशूल, खड़ग-धारिणी!
माँ! तेरी कृपा बरसे नित अमि-धार सी!
वात्सल्य-सुधारस-बुंदे तेजस रत्नों सी!
अमृत-कुंभ-कलश करे प्रक्षालन केसर सी!
गुलाब-जल में पंखुड़ियां नृत्य करें बसंत सी!
माँ दुर्गा! जगत दीपिका, सिंहआरोहिणी!
कालरात्रि, पाप-नाशिनी मुंड-धारिणी!
खड्ग, त्रिशूल, कुंभ, कमल, अष्टभुजा धारिणी!
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, कात्यायनी, महागौरी, काली, दुर्गा असुर-संहारिणी!
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई, महाराष्ट्र!