प्यार के रंग
प्रतियोगिता के लिए (6)
मां, लौट आओना मां।
हरपल मां साये की तरह साथ होती हो,
चिलचिलाती धूप में, कंपकंपाती ठंड में।।
आपका मार्गदर्शन, जीवनपथ करता आलोकित,
आपकी यादों के दीप महकाते आत्मियता पूष्पित।।
जादू की झप्पी के लिए तरसता है मन मेरा,
यादें आपके स्नेहिल स्पर्श की रुलाती है मुझे।।
ऐसे बीच मंझधार छोड दोगी, विश्वास नहीं होता मां,
ढूंढती है निगाहें, मिले एक झलक, आपके दर्श की मां।।
मां, लौट आओना मां,
लौट आओना मां।।
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र