चाय की तलब


चाय की तलब

तलब हैं चाय की, ठिठुरती ठंड में,
आस, गरम चाय मिले कुल्हड में,
साथ में पिया सजना हो हमारे,
महकेगी चाय, हो लज्जत चाय में।।

चाय के साथ खिले प्रेम, संजीदगी,
इलायची सुरभित चाय दे ताजगी,
बढाता सामीप्य, रिश्तों में अपनत्व,
चाय के मिठास में घुली हो जिंदगी।।

स्वाद संग बातें नयी पुरानी मजेदार, 
फाफडा, जलेबी, दूध मसालेदार,
मीठे, खट्टे, तीखे व्यंजन चटपटे,
साथ फल, सूप, सेहत के पहरेदार।।

चाय गरम, कडक, पिये मीठी, फीकी,
कोई पिये चाय सम्मान में मित्रता की,
चाय तो एक बहाना मिलन, जुडाव का,
बेड टी बिना किसी की आँखें नहीं खुलती।।

स्वरचित मौलिक रचना 
चंचल जैन

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