3 3 6331 3 6331 चौकलेट जीवन उतार-चढ़ाव में न हो कभी खटास,काजु-किसमिस-चौकलेट की हो मिठास!रिश्ते पे न हो कभी छल-कपट का मुल्लमा,स्फटिक सा मन, विश्वास-समर्पण हो बलमा!स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई Label Directed by द्वारा कुसुम सुराणा Shared10 Feb 2025 Start 10 Feb 2025 End 10 Feb 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Tanu Jain 24-Apr-2025 Comment Like बहुत खूब Sheetal Jain 26-Jul-2025 Comment Like बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ। Jain Mikhil 08-May-2026 Comment Like आप चमकते रहें और बढ़ते रहें चौकलेट © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें