प्रतियोगिता
#प्यार के रंग
#दिन शुक्रवार 7 फरवरी 2024
#विषय गुलाब
#कहानी स्वरचित अप्रकाशित
श्रद्धा आज सुबह से सभी को देख रही थी ।आज रोज डे था। सभी गुलाब लिए अपने प्यार का इजहार कर रहे थे। उसे देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। मन कहीं ना कहीं अपने मनमीत को ढूंढ रहा था ।वह ऑफिस पहुंची वहां भी सभी एक दूसरे को गुलाब देकर प्यार का इजहार कर रहे थे। लेकिन उसका उदास चेहरा बस यही कहता मेरे जीवन में न जाने यह पल कब आएगा? श्रद्धा अपने ख्यालों में डूबी हुई थी श्रद्धा को एहसास भी ना था आज कोई उसके जीवन में प्यार का रंग भरने वाला है। अचानक उसके टेबल के सामने संजय आकर खड़ा हो जाता है कहता है हलो श्रद्धा मैं संजय श्रद्धा सामने उसे देखकर हतप्रभ हो जाती है। जिस पर न जाने कितनी लड़कियां मरती होगी आज वह मेरे सामने ,वह उठकर खड़ी हो जाती है सर आप संजय सर नहीं श्रद्धा संजय कहो और गुलाबों का बना गुलदस्ता उसके हाथों में दे देता है। वह कहती है क्या है ?संजय ने कहा मैंने एक साल इंतजार किया आज वह पल आ गया। मैं तुम्हें कहता हूं आई लव यू श्रद्धा तुम्हें मैं अपना लाइफ पार्टनर बनाना चाहता हूं। श्रद्धा की आंखों में खुशी के आंसू बह रहे थे ।श्रद्धा ने कहा पर तुमने मुझे ही क्यों चुना? मैं तो साधारण परिवार से हूं । संजय ने प्यार से कहा
" सादगी तेरी मुझको भाग गई
ना जाने कब से तुम रूह में समा गई
अनमोल है तू मुझे सबसे
आज मेरी जिंदगी में आ गई "
दोनों एक दूसरे को देखते रहे सभी लोगों ने उन्हें देखकर तालियां बजाने लगे तालियों की शोर ने चुप्पी तोड़ी और वह एक दूसरे के हो गए । आज श्रद्धा को सच मुच मनमीत मिल गया। आज मुझे भी गुलाब मिल गया आप फोटोकसे करेगा
श्रीमती सविता शर्मा
मुंबई