शिव-पार्वती!

हिमशिखरों की कोख से निकली कुंकुम वर्णी अरुणिमा,

टुकुर-टुकुर निहारे त्रिलोकपति शिव शंकर की प्रियतमा!
 
हिमाचल की पुत्री गौरा करें शिव प्राप्ति हेतु तप,साधना, 
कर त्रिशूल, डमरू,जटाओं से बहे भागीरथी महामना!
 
भाल पर भस्म, जटाओं पर सजा हरियाली तीज का चंद्रमा!
हरियाली तीज ने बदली, मदमस्त मौसम की भाव-भंगिमा!
 
अखंड सौभाग्यकांक्षिणी पार्वती, भावे करे तप, आराधना!
कुंवारी गौरा करे मनवांछित वर के लिए भक्ति, पूजा-अर्चना!
 
ॐ नमोः शिवाय,ॐ नमोः शिवाय से गूंजायमान आकाश, 
देवी-देवता शरणागत जहाँ त्रिनेत्र भोले शंकर का कैलाश!
 
गौरंगी बनी प्रियंवदा रूद्र की, भोले शम्भू की सहगामिनी,
जगत कल्याण हेतु माँ कल्याणी बनी भोलेनाथ की स्वामिनी!
 
ममता की मूरत, करुणा सागर, बनी खल-असुर सँहारिणी,
पद्मकमल सी कोमल, दया धारिणी बनी दुःख पीड़ा हारिणी!
 
जटाधारी, सर्प-श्रृंगार सुसज्जित शिव, करें ताण्डव भारी,
धर्म-सुकर्म रक्षण हेतु, करुणासागर बने शव-भभूति धारी!
 
जगत जननी, मात भवानी, भोले की प्रिय, त्रिलोक नारायणी,
शिव-शम्भो की सहचरी, धर्म-ध्वजा धारिणी, माता कल्याणी! 
 
तेरी महिमा अपरम्पार, तू शिव-शक्ति रूपा, ज्ञान स्वरुपा पाणिनि
भोलेनाथ की गौरांगी तू, तू जगत-दीपिका , महाकाल अर्धांगिनी! 
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