बुधवार 28 जनवरी
विषय-संघर्ष
कहानी
अभी तक उर्मिला की शादी को पच्चीस
साल हो चुके थे,
बहुत ही कुलीन खाता पीता सुखी परिवार था ,अपने पति कामेश का हीरे का अच्छा खासा कारोबार था, जीवन में पहले संघर्ष करना पड़ा, पर बाद में सब ठीक हो
गया था ।
उर्मिला को शादी लायक तीन बेटियां भी थी, एक से बढ़ कर एक खूबसूरत और सभी ऐशो आराम में पली बढ़ी थी,
बदकिस्मती से हीरे यानी डायमंड के कारोबार में इतनी मंदी आ जाती है कि गुजारा मुश्किल था। तीन साल में तो जैसे ,अर्श से फर्श पर आ गया कामेश का कारोबार, बेटियों की शादी के लिए जमा रकम से कैसे की घर चल रहा था, कुछ दिनों से कामेश शाम को आफिस से लौटता, मुॅंह लटका रहता , दरसअल कामेश, गहरे अवसाद में था, चुंकि बाजार एक दम ठप सा पड़ा था ।
घर पे थोड़ा बहुत पता था पर इतना भी नहीं मालूम था कि हालात इतने खराब हैं,
कामेश को बहुत बुरे विचार आने लगे थे, कभी-कभी आत्महत्या का विचार आ रहा था।
कामेश की तीनों बेटियां बहुत ही समझदार और शालीन थी, वैसे ही उर्मिला भी इतनी ही
सजग सुशील व समझदार महिला थी, कामेश का चेहरा चारों ने भांप लिया था,की पापा गहरे अवसाद में हैं। इस बात पर चर्चा हुई तब सारा मसला मालूम हुआ।
उर्मिला ने अपने पति को आश्वस्त करती और कहती कि आप बिल्कुल चिंता मत करों, धैर्य रखें , तेजी मंदि आती रहती है , ज्यादा दिक्कत है तो आप इस कारोबार को समेट लो,
थोड़े दिन इंतजार करों, वर्ना कोई नौकरी ढूंढ लो । लड़कियाॅं एक सूर में कहती, "पापा! आप चिंता न करें, हम अपना खर्चा कम कर कर लेते है "
कामेश का दुःख थोड़ा कम हुआ, वैसे भी संघर्ष के समय संबल की जरूरत रहती है,
यदि घर से ताना मिला होता तो कामेश शायद आत्म हत्या कर लेता, ऐसी चिंता घर कर गयी थी ।पर ईश्वर का शुक्र की ऐसा नहीं हुआ।
उर्मिला ने कहा, "मैं मेरी जमा पूंजी मेंसे एक सिलाई मशीन ला देती हूॅं, मैंने ड्रेस डिजाइनिंग का कोर्स कर रखा है, हम सब क्या काम के , हम सब मिलकर आराम से घर चलाएंगे, कम कमाई होगी तो कम में चलाएंगे।"
कामेश मन ही मन भगवान को धन्य वाद दे रहा था कि मैं कितना भाग्यवान हूॅं कि ऐसी सुशील पत्नी व ऐसी एक से बढ़कर एक सुंदर व समझदार बेटियां जो मिली है ।
नकारात्मकता नाम की कोई चीज नहीं , चारों में से किसी एक ने उल-जलुल लफ्ज़ नहीं निकाला । पूरे परिवार का साथ मिला, कामेश को अच्छी जोब मिल गयी और उर्मिला का बुटीक भी अच्छे से चल रहा है। अब बेटियां अपने काम कारोबार में व्यस्त हैं । बड़ी बेटी की सगाई भी अच्छे घर में हो गयी , अब सारे खुश हैं ।
स्वरचित:अशोक दोशी