विषय :युवा तन युवा मन
विधा: कविता
युवा तन युवा मन वो निराला,
अंग उमंग रंग जोशीला ।
सैन्य बल शक्तिमान गठीला,
खड़ा ज्यों नग वो रोबीला ।।
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हमें नाज़ है उन कंधों पर ,
डटा खड़ा सीमा पे जो।
करता सुरक्षा वो देश की,
न बट्टा लगे रीमा पे वो।।
किसान तकनिशियन वैज्ञानिक ,
दक्ष युवान वो हमारा है ।
आगे बढ़ाता इस देश को,
ये भारत मेरा प्यारा है।।
मजदूर प्रचालक संचालक,
कल कारखाने चलाता है ।
कोई सहयोगी चाकर सेवक,
देश निधी में वो आता है।।
करें कारोबार वे धंधा
काम करें पुल बांध बंधो पर
जो कर्म शील सशक्त युवक
हमें नाज़ है उन कंधों पर
जो भी निष्ठा वान जवान है ,
नमन उनको करेंगे जी ।
उम्र पद भले क्यों हो न छोटे,
शाबाशी हम देंगें जी।।
स्वदेश देश की वे धरोहर ,
युवा धनों से जीते हैं ।
उनकी वजह से ही हम सभी ,
सोते खाते पीते हैं ।।
प्रेरणा लेना उन युवान से ,
कर्मठ कारोबारी है ।
ठाले निकम्में युवा जोभी,
लानत के अधिकारी हैं ।।
मत गंवाना शक्ति फ़ालतू ,
युवान को संदेशा है ।
युवा जो करें केवल मस्ती,
सदा रहे अंदेशा है ।।
स्वरचित:अशोक दोशी