प्रतियोगिता
प्यार के रंग (4)
टेडी
'टेडी' सबका प्रिय मित्र है। मेरी बेटी को तो बहुत ज्यादा पसंद है। पहली बार जब दो साल की थी, नीलम भुआ जी उसे टेडी दिया था, जिसे गोदी में लेकर उसने लोकल में अपना सफर किया था। ऐसे थामा था जैसे कोई मां अपने लाडले को कसकर सीने से लगाती है।
प्रेम का निश्चल पावन रूप देख सबके चेहरे पर हंसी खिल रही थी।
अब तो जो भी आता उसके लिए छोटा- बड़ा टेडी जरूर लाता। बिटिया ऐसे हर्षित होती, जैसे कोई बेशकीमती तोहफा मिला हो।
टेडी घर में अब आराम फरमा रहे हैं। थोड़े बहुत बांट दिये, लेकिन थोड़े संभालकर रखे हैं। बिटीया ससुराल में रहती है और हम टेडी से बतियाते है। उतना ही प्यार हमें भी टेडी से हो गया है।
चंचल जैन