दोहे... कतरा कतरा खून का, करूं वतन के नाम,
विजय दिवस पर देश को, शत शत करूँ प्रणाम|

कर स्वतंत्रता-कामना, हो बलिदानी शूर |
कर दुश्मन का सामना, मिटा सभी नासूर ||

उमड़-घुमड घन साँवरे, खेले खग दुत्कार |
रजनी के शुभ प्रहर में, गाएँ मेघ मल्हार ||

उमड़-घुमड घन साँवरे, खेले पवन दुलार |
रजनी के शुभ प्रहर में, गाएँ मेघ मल्हार ||

कार्य-कुशल मधुमक्खियां, पिएं नित्य मकरन्द |
मीठी बोले बोलियाँ, कर्म योग ही छन्द ||

कार्य-कुशल मधुमक्खियां, पिएं नित्य मकरन्द |
बोले मीठी बोलियाँ, कर्म योग ही छन्द ||

वतन-वीर! रणबांकुरे, नमन तुझे सौ बार |
करता रक्षा सर्वदा, राष्ट्र-धर्म स्वीकार||

क्या स्वतन्त्र हैं चाहतें, राहें, लक्ष्य, विचार?
जननी कुक्षी में मिले, शिशु तन मन आकार||


स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।



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