प्यार की एक डोरी रक्षाबंधन की सुबह थी, और अनन्या के घर में मिठाइयों की खुशबू फैली हुई थी। उसने अपने हाथों से बनाई हुई राखी को प्यार से उठाया — वह साधारण थी, लेकिन उसमें उसका दिल बसा था। इस साल कुछ अलग था। उसका बड़ा भाई आर्यन नौकरी के सिलसिले में दूसरे शहर चला गया था और घर नहीं आ सका था।

वह पूजा की थाली के पास चुपचाप बैठी थी, तभी उसकी नजर पुराने एलबम पर पड़ी — बचपन की तस्वीरें थीं, जहाँ वे आखिरी चॉकलेट के टुकड़े के लिए लड़ते थे, एक-दूसरे का होमवर्क करते थे, या बस यूँ ही हँसते रहते थे। उसकी आँखों से एक आँसू टपक पड़ा। उसे भाई की बहुत याद आ रही थी।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी। अनन्या भागकर दरवाज़ा खोलने गई — और सामने आर्यन खड़ा था, हाथ में फूलों का गुलदस्ता और चेहरे पर मुस्कान।

"क्या तुमने सोचा कि मैं रक्षाबंधन पर नहीं आऊँगा?" उसने मुस्कुराते हुए कहा।

अनन्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने राखी बाँधी, और आर्यन ने उसे एक तोहफा देते हुए कहा, "चाहे मैं कहीं भी रहूँ, ये डोरी हमेशा मुझे तुम्हारे पास खींच लाएगी।"

संदेश: रक्षाबंधन सिर्फ तोहफों और रस्मों का त्योहार नहीं है — यह भाई-बहन के बीच के उस गहरे प्यार, सुरक्षा और अपनापन का प्रतीक है, जो दूरी के बावजूद कभी कम नहीं होता।

द्वारा Veena Jain
Shared06 Aug 2025
Start 31 Dec 1899
End 31 Dec 1904
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