मन
वाकिफ नहीं हूं इस मन से
कहीं ठहरता नहीं, न ठहरने देता
सोचता भी हूं तो इस मन से
न कुछ करता है न हीं करने देता।
 
कहता है कि मुझे खुश रखो
और तरीके स्वयं ही बताता है
कहता है तू मेरा गुलाम है
और सारा दिन मुझे ही सताता है।
 
मैनें सोचा अपने ही इस मन से
कि ऐसा मैं क्या कर जाऊं?
जिससे इसको बुरा भी न लगे
और इसका मैं दोस्त बन पाऊं?
 
मन ने तुरंत जबाब दिया—
या तो तू काम कर या करने दे मुझे
मैने सोचा यदि मैं काम करूं तो
इससे अच्छा क्या होगा मुझे..
 
मैं तो चाहता ही यहीं हूं कि
मैं काम करूं और तू सहयोग कर
अच्छा ही हो यदि हम दोनों व्यस्त रहें
मैं कर्तव्य करूं और तू मार्गदर्शन कर।
 
आज हम दोनों ही खुश है
हमने एक दूसरे को अपना लिया
मन को खुशी मिल गयी
मुझे जीने का सहारा मिल गया।
                       -KAPIL TIWARI

द्वारा Kapil Tiwari
Shared08 Dec 2025
Start 08 Dec 2025
End 08 Dec 2030
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत खूब.. दीप से दीप जलेंगे तो जीवन रोशन हो जायेगा! प्रेरणादायक सुन्दर प्रस्तुति!
  • बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बधाई!