3 5537 3 5537 नवल आस झरझर झरती पात, ग्रीष्म ऋतु की मनमानी।नवल सृजन की आस, सृष्टि की रास सुहानी।।पतझड़ खिलते फूल, सुरभि का साज तराना~प्रकृति करे उपकार, भावना हो नित दानी।।चंचल जैन Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared14 Apr 2025 Start 14 Apr 2025 End 14 Apr 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें नवल आस © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें