नारी है सृजन की धारा, नारी जीवन का आधार,
नारी के बिन जग है अधूरा, नारी बिन सूना संसार।
जब से सृष्टि ने आँखें खोली, तब से है उसका योगदान,
ममता, शक्ति, प्रेम, करुणा, नारी है हर गुण की खान।
जब जननी बन गोद सजाए, तब दुनिया खिल उठती है,
माँ के आँचल की छाँव तले ही, हर पीड़ा सिमटती है।
उसकी लोरी में मीठा संगीत, उसके प्रेम ही सच्चा है,
माँ के बिना अधूरा बचपन, जीवन उस बिन कच्चा है।
वही बने बचपन की साथी, वही बांधे रक्षा का धागा,
हर मुश्किल में संग खड़ी हो, बहन बिना हर भाई अभागा।
संगिनी बन जब हाथ बढ़ाए, तब वो घर को स्वर्ग बनाती,
पति की हर पीड़ा को हरकर, प्रेम से है जीवन को सजाती।
संग चले वो हर संघर्ष में, कदमों में रखती ना दूरी,
त्याग, प्रेम की ये प्रतिमूर्ति, होती है हर घर के लिए जरूरी।
बेटी जब घर में है आती, तब खुशियाँ वो संग है लाती,
पिता के दिल की राजदुलारी, हर मुश्किल को वो है मिटाती।
बेटे-बेटी में भेद न रखना, बेटी भी है घर की शान,
आज की नारी नही है अबला, वो है अब खुद की पहचान।
गृहिणी हो या कोई वैज्ञानिक, हर क्षेत्र में आगे बढ़ती है,
संघर्षों से नही है डरती, हर मुश्किल को पार करती है।
कलम उठाए, ज्ञान लुटाए, सीमा पर बंदूक चलाए,
क्या क्या दें हम उसको उपमा, अनगिनत गुण हैं उसमें समाए।
नारी बिना अधूरा जीवन, नारी बिन है अधूरा समाज,
नारी का सम्मान करें सब, क्योंकि नारी से ही है कल और आज।