संक्रांति, पोंगल, बिहु, लोहड़ी की लख लख बधाइयाँ!


"खुशियों का त्यौहार है आया।
घर-घर आनन्द-उल्हास लाया।।
सपनों को दिया सच का औरा।
खेत खलिहान गएं यौवन से बौरा।।"

कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
इस पर लोग क्या कह रहे हैं