2 7 5512 2 5512 हमराही हमराहीसुख-दुख आये जाये, साथी साथ निभाना।विपदा में हमराही, संबल बनकर आना।।रंग बदलते रिश्तें, अपने बनते स्वार्थी~महती जब हो पैसा, पूजे देख जमाना।। स्वरचित मौलिक रचना चंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्र Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared17 Apr 2025 Start 17 Apr 2025 End 17 Apr 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कुसुम सुराणा 18-Apr-2025 Comment Like वाह! बहुत खूब! Sundeep Jain 30-Apr-2025 Comment Like बहुत खूब Saanvi Jain 06-Jun-2025 Comment Like आप चमकते रहें और बढ़ते रहें Intranet Demo 15-Jun-2025 Comment Like मनमोहक शब्दों से बयाँ करते सुन्दर ! बधाई Intranet Demo 05-Sep-2025 Comment Like वाह वाह! बहुत खूब! सुन्दर प्रस्तुति! Intranetuser Demo 22-Apr-2026 Comment Like बहुत खूब! Creativeinfo Demo 19-Jun-2026 Comment Like मस्त हमराही © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें