शिक्षक!

शिक्षक दिवस-संस्मरण 

 

शिक्षक हमारी गति को गतिमान बनाने के आधार बनते हैं। ऐसा ही हुआ जब मैं छठी कक्षा में पढ़ती थी तो एक बार हिंदी अध्यापिका जी ने हमें "मॉं के साथ रूठने और मनने का आनंद" लेख लिखने को दिया। मैंने अपने मन की भावनाओं से, निश्चलता से लेख लिखा जो अध्यापिका जी के मन को छू गया। उन्होंने मेरा लेख कक्षा में पढ़ा। मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैंने अध्यापिका जी से पूछ लिया कि आपने मेरा ही लेख कक्षा में क्यों पढ़ा ॽ तो उन्होंने हॅंसते हुए कहा कि तुम्हारी शैली मुझे बहुत पसंद आई इसलिए। 

 

तुम एक दिन बहुत आगे जाओगी। मैं रहूॅं या ना रहूॅं लेकिन तुम मुझे जरूर याद करोगी। ये उन्हीं के शब्द न जाने कितनी बार कानों में गूॅंजते है , और न जाने कितनी बार पायल की मृदुल झंकार कानों में झंकृत हो उठती है। काश। आज मैं उन्हें बता पाती।

यह संस्मरण सिर्फ शिक्षक दिवस पर ही नहीं बल्कि हर दिन उनके शब्द मुझे प्रेरणा देते हैं। यह गुरु का आशीर्वाद ही है जो आकाश में उड़ने को पंख देते हैं।

कनक पारख, विशाखापट्टनम

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