घनाक्षरी छंद

घनाक्षरी छंद

नेता गुनगुना रहें,
गली-गली घूम रहे,
नोटों की उछाल हैं,
गौर फरमाइए।।

एक दूजे की धुलाई, 
हो रही टांग खिंचाई, 
तू-तू मैं-मैं की तूती,
वादें आप पाइए।।

धरा पर आये तारें,
उजले दोगुले सारें,
श्वान साथ-साथ चले,
दामन बचाइए।।

मीठी मिश्री से बोलते,
हाथ जोडे वे रहते,
सुध बुध चेत कर,
निशान लगाइए।।

चंचल जैन


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