6 1 6776 6 6776 सफर जिंदगी का फोटो प्रतियोगिताथक गये हैं पांव साथ चलते-चलते,सूरज हुआ मद्धम शाम ढलते-ढलते,पलभर ले लो विश्राम दूर है मंजिल,कट जायेगा सफर बातें करते-करते।।स्वरचित मौलिक रचनाकारचंचल जैन Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared01 Jan 2025 Start 01 Jan 2025 End 01 Jan 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Saanvi Jain 17-Aug-2025 Comment Like बेहतरीन सफर जिंदगी का © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें