नमन मंच
दिनांक १४-१०-२०२५
विषय:कल की चिंता छोड़
विधा: दोहे
कल की चिंता छोड़ दो,रखो आज का मान।
कल की चिंता में भला,क्यों खोता तू आन।।
कल की चिंता में मृषा,बोझा ढोये व्यर्थ।
होना होगा होयगा, वो सत ईश समर्थ।।
रख मत इतना भार तू,कल की चिंता छोड़।
नेक काम करते रहें, साहस कर तन तोड़।।
पता नहीं है वक्त का, हाथ नहीं संसार।
कल की चिंता छोड़ दो, क्यों होता बैजार।।
करते रहना कर्म वो, सजे धजे परिवार।
शक्ति बचे वो भी करो, दान धर्म उपकार।।
स्वरचित: अशोक दोशी