रंगों में भीगे, शब्दों में जीऐं
रंगों में भीगें, शब्दों में जीएं 

रंगों का रथ फागुन लाया, ठंडी चली बयार 
लाल , गुलाबी , नीला , पीला, रंगों की बौछार 
भीगीॲंगिया , भीगी चुनरी, भीगे है घर द्वार 
भीगा मौसम, भीगा ऑंगन, भीगा है दरबार। 

रंगों में भीगे सब भाई, मुख पर मीठे बोल 
आपस में हिलमिल कर खेलें, सोच-सोच मुॅंह खोल 
सद्भावों के रंग लगाकर, बैर भाव सब छोड़ 
होली पर खेलो सब मन से, स्नेही नाता जोड़। 

जीना यदि वचनों में आए , मिलता जीवन सार 
बात -बात पर करें न झगड़ा, रंगों से हो प्यार 
समरसता जीवन में धारे , छोड़े सारे बैर 
जीवन है अनमोल सखी री, नहीं यहॉं पर गैर । 
इस पर लोग क्या कह रहे हैं