शिक्षक के हाथ में
एक घोषणा कर दीजिए यूं बात बात में 
एक कदम उठाइए शिक्षा के साथ में 
गर छात्र में अनुशासन लौटाना चाहते
तो छडी़ लौटाइए शिक्षक के हाथ में 

हीन को परम और परम को हीन कर
मोती कैसे लाएंगे कूडे़ से बीन कर
संतुलन बनाईए कि दोनों हैं मौलिक 
कर्तव्य बोध कैसे हो अधिकार छीन कर

उजाले कैसे होंगे फिर अंधेरी रात में 
कि छडी़ लौटाइए शिक्षक के हाथ में

देशहित को छोड़ किसी ओर न चले
उनका ही आज कहीं कोई जोर न चले
ज्ञान के दीपक को ऐसे थाम के रखते
जैसे छोड़ के बरसात कभी मोर न चले

उसका भी न होता कोई बुरे हालात में 
कि छडी़ लौटाइए शिक्षक के हाथ में

छड़ी नहीं छीनी गई,छिना है आत्मबल
राजनीति ने किया शिक्षा जगत से छल
कमजोर गुरु जी नहीं बनाईए हूजूर
शिक्षा जगत के लोगों को बनाईए सबल

उलझाइए बिल्कुल नहीं अब जात-पात में 
कि छडी़ लौटाइए शिक्षक के हाथ में

बेजान सी व्यवस्था में कुछ जान दीजिए 
गुरुओं के कद को आप जरा मान दीजिए 
सिर्फ तन से और धन से कुछ नहीं होगा 
मन से भी पूरा उन्हें सम्मान दीजिए 

उपकार उन सा किसी का न कायनात में 
कि छडी़ लौटाइए शिक्षक के हाथ में

विक्रम कुमार 
मनोरा, वैशाली

द्वारा Vikram Kumar
Shared09 Sep 2025
Start 09 Sep 2025
End 09 Sep 2030
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