करूं आज मैं आरती तेरी
धर के घृत मन दीप
तेरे चरणों में शीश झुकाऊं,-2
रख मोहे चरण समीप
हे जी रे मैनें -२
नत ननौं में ,नेह लिया संजोए
है जी रे प्रभु , दर्श दीवाना तेरा
तुझमें गया हूँ खोए
करूं आज मैं आरती तेरी....
पहना कर फूलों की माला,
बजाऊं सुर संगीत
प्रभु भक्ति में झुम के गाऊं
प्यारे भक्ति के दो गीत
है जी रे मैंतो, दर्श दीवाना तेरा
गया तुझमें है खोए
करूं आज मैं आरती तेरी....
चाहु मैं प्रभु पथ मुक्ति का
चाहु मैं समकित
सम्यक दर्शन ज्ञान के मोती
मिल जाना मुझे त्वरित
है जी रे मैंतो, दर्श दीवाना तेरा
तुझमें गया हूँ खोए
करूं आज मैं आरती तेरी....
बतला दो मुझे कोई युक्ति
कोई सूक्ति मेरे परमेश
कैसे पाना तुमको प्रभुजी
मिल जाए कोई उपदेश
है जी रे मैंतो, दर्श दीवाना तेरा
तुझमें गया हूँ खोए
स्वरचित:अशोक दोशी