दिनांक ८-१०-२०२५
वायुसेना दिवस पर समर्पित.....
शीर्षक:गगन के रक्षक
विधा :काव्य
भरे उड़ानें ऊंची-ऊंची,
जांबाज वायु सेना के ।
करते सीमाओं की रक्षा,
अपने पद पे तैना है।।
सघन अभ्यास कलाबाजियां
उलट पलट कर करते हैं ।
दुश्मनों पर नज़रें गड़ाएं ,
वे मौत से न डरतें है ।।
नभ सेना अधिकारी सारे,
नमन हमारा स्वीकारें ।
वायु सेना दिवस का अवसर,
जयकारे गूंजे नारे।।
बोल वाक्य "नभः स्पृशं दीप्तम्,
बल मनोबल बढ़ाना है ।
आकाशवीर जांबाजों का,
गान हमें गुण गाना है ।।
प्राप्त हुए वीर, वीर गति वे,
श्रद्धा सुमन चढ़ा आएं।
जा न सके हम बलि वेदी पर,
मन में भक्ति भाव लाएं।।
वीर सैनिकों पे लिख कविता
लिखे गीत हम निष्ठा से ।
देश भक्ति का भाव खिला दो,
कवि धर्म का प्रतिष्ठा से ।।
आज मौका और दस्तुर भी
उठाएं हम कलम अपनी
लिखें शब्द गगन रक्षकों पर
करते रक्षा कर तपनी ।।
कहाॅं बल है हमारा अपना,
हथियार हम उठा पायें।
दें कलम से नैतिक समर्थन,
प्रसंशा में गज़ल गाएं।।
स्वरचित:अशोक दोशी