सफर अकेला पर मैं टूटी नहीं

“ज़िंदगी इतनी मुश्किल होगी, कभी सोचा ना था,
किसी ने हाथ थामा… और कितनों ने बीच राह छोड़ा, ये भी सोचा ना था।
सोचा था साथ हमेशा रहेगा,
पर ये वक़्त भी बदल जाएगा, ये भी सोचा ना था।
रात है तो क्या हुआ, सुबह तो होगी ही,
पर हर सुबह में वही लोग साथ होंगे… ये ज़रूरी नहीं था।”


द्वारा दिया जयसिंघानी 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं