प्रतियोगिताप्यार के रंग
गुलाब
महकता गुलाब
हमारी हिंदी विषय की प्रिय शिक्षिका दुर्घटना में जख्मी हो गयी थी। लंबे अंतराल से प्रशाला नहीं आ रही थी। हम सब विद्यार्थी उनसे मिलना चाहते थे।
वसंतोत्सव की धूम मची थी। रंगबिरंगे गुलाब पुष्पों से बाजार गुलजार थे। लाल, पीले, गुलाबी, सफेद सुंदर सुंदर फूल।
हम सब मिलने को उत्सुक थे। ढेर सारे पीले गुलाब खरीदे। गुलाबी और सफेद भी। महकते गुलाब और खुशी से चहकता हमारा मन।
हमारी शिक्षिका नम्रता जी की आंखे हमें देखकर नम हो गयी। भावावेश में उन्होंने हमें गले लगाया। जैसे वह केवल शिक्षिका नहीं हमारी अभिभावक हो।
गुलाब के फूल देकर हमने उन्हे वंदन किया और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
उनके स्नेह से हम अभिभूत थे। उन्हे जख्मी करने वाले के प्रति रोष था मन में।
क्यों किसी की लापरवाही का दंड और कोई भोगे?
परेशान थे हम। कायदे कानून पालन के प्रति संकल्पित, और सजग भी।
महकता गुलाब हमारे लिए अशेष शुभकामनाओं भरा गुलदस्ता था। और हमारी शिक्षिका के प्रति हमारा आदर भाव।
स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन