माँ

माँ, मीठा, मृदुल एहसास है,
माँ, नन्हें का अटल विश्वास है,
आँचल में सजा हैं सारा संसार,
माँ, सतरंगी जीवन आस है।।

माँ, अमृत धार दुलार की,
गठरी शुभाशीष, दुआओं की,
माँ की गोद में दिव्य स्वर्ग सुख,
माँ, सर्वोत्तम कृति प्रभु जी की।।  

माँ की बाहों का झुला झूले,
लोरी में माँ ममता रस घोले,
सजाती भविष्य के सपने सुनहरे, 
नवांकुर पलने में ले हिचकोले।। 

खिले नवजात ममता की छाँव में,
बचपन चहके माँ के आँचल में,
माँ की छत्रछाया में, महके यौवन,
चारों धाम दर्शन माँ के चरणो में।।

स्वरचित मौलिक रचना 
चंचल जैन 
मुंबई, महाराष्ट्र

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत ही हृदयस्पर्शी और सराहनीय कविता लिखी है। इसे पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई
  • ❤️❤️
  • लाजवाब ❤️🙏❤️🙏❤️