मैं बिखर जाऊं गर कभी तो वो मेरा किनारा बन जाता है....
मैं विचारों के बोझ तले दब जाऊं तो वो मेरा सहारा बन जाता है...
वो संभाल लेता है मुझे हर एक परिस्थिति में...
जब ज्यादा खुश रहूं मैं या मेरी खराब मनःस्थिति में...
मैं चुप हो जाती हूं... जाने कहां खो जाती हूं...
वो फिर भी ढूंढ लाता है मुझे चाहे कितना ही उसे सताती हूं...
वो प्यार जताता नहीं है... लेकिन उसके प्रयासों से सब दिखता है..
वो दिल खोल के करता है बातें मुझसे जैसे ही उसे वक्त मिलता है...
वो दूर नहीं होता मुझसे चाहे मैं कितना भी कोह दिखाऊं...
वो मुस्कुरा देता है प्यार से जब भी मैं उस से अपना मोह जताऊं..
कैसे वो इतना स्नेह अपने अंदर संजो के रखता है...
वो किसी भी हाल में रहे सब से खुश हो के मिलता है...
वो गुणों में स्फटिक मणि सा है...
वो स्वभाव में बारिश की कणी सा है..
वो शांत है.. मैं चंचल घड़ी की सेकंड वाली सुई की तरह...
मुझे किस्सा अपना लगता है कहानी कोई जादुई की तरह..
Awaaz Lafzon ki
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